ईओडब्ल्यू को सरकार ने नहीं दी जांच की अनुमति, तो हाईकोर्ट में याचिका आजीविका मिशन के सीईओ बेलवाल सहित कई अफसरों के मामले
भोपाल। राज्य आजीविका मिशन में हुई फर्जी नियुक्तियों के मामले की शिकायत आर्थिक अपराध ब्यूरो में किए जाने के बाद इस मामले में ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन एसीएस इकबाल सिंह बैंस, पीएस पंचायत एवं ग्रामीण विकास मनोज श्रीवास्तव, अशोक शाह सहित राज्य आजीविका मिशन के सीईओ एमएल बेलवाल के खिलाफ सरकार से इनके विरुद्ध जांच की अनुमति मांगी थी, लेकिन जीएडी कार्मिक द्वारा मामले को पेंडिंग रखा गया और जांच की अनुमति नहीं देने के बाद अब शिकायतकर्ता ने सोमवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। अधिवक्ता आरके मिश्रा ने राज्य आजीविका मिशन के तत्कालीन सीईओ एमएल बेलवाल द्वारा की गई फर्जी तरीके से कर्मचारियों की नियुक्तियों के मामले में मुख्य न्याययिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी भोपाल में एक परिवाद प्रस्तुत किया था। जिस पर भोपाल न्यायालय ने थाना प्रभारी ईओडब्ल्यू को इस संबंध में 28 मार्च 2024 तक स्टेट्स रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इस पर ईओडब्ल्यू भोपाल ने प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश तर्क में कहा था कि परिवादी आरके मिश्रा द्वारा परिवाद में लेख किया है कि घटनाक्रम की शिकायत पुलिस थाना शाहपुरा भोपाल में की थी, परन्तु पुलिस द्वारा अपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया गया। परिवाद में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ से संबंधित कोई तथ्य उल्लेखित नहीं किया गया। इस पर आवदेक द्वारा तत्कालीन एसीएस इकबाल सिंह बैंस, राज्य आजीविका मिशन के प्रबंधक एमएल बेलवाल, पीएस पंचायत एवं ग्रामीण विकास अशोक शाह एवं मनोज श्रीवास्तव के विरुद्ध प्रकोष्ठ में शिकायत पत्र आवक क्रमांक 659/24 तारीख 18 मार्च 2024 को प्राप्त हुआ।
ईओडब्ल्यू ने अनुमति के लिए जीएडी को भेजा था पत्र
इस मामले में ईओडब्ल्यू ने लिखा-पत्र का परीक्षण करने के बाद पाया कि अनावेदकगण के विवादित कार्य उनके द्वारा अपनी पदेन हैसियत से किए गए शासकीय कार्य या अपने कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए आदेश या सिफारिशों से संबंधित है। जिसकी विवेचना प्रारंभ करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-17 ए के तहत अनुमति आवश्यक है। इसलिए शिकायत आवेदन प्रमुख सचिव कार्मिक मप्र शासन जीएडी मंत्रालय को मूलत: आवश्यक कार्यवाही के लिए यह लेख करते हुए प्रेषित किया गया है कि यदि विभाग प्रकरण में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा जांच किए जाने का निर्णय लेता है, तब विभागीय अनुशंसा के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-17 के तहत विवेचना प्रारंभ करने की अनुमति सहित प्रकोष्ठ को प्रेषित किया जाए, लेकिन जीएडी ने इन अधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति नहीं दी। यह पत्र जीएडी को थाना प्रभारी डॉ. निदेश जोशी ने 26 मार्च 2024 को भेजा था।
हाईकोर्ट में दायर की याचिका
इस मामले में सरकार द्वारा इन अधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद सोमवार 6 जनवरी को शिकायतकर्ता आरके मिश्रा ने जबलपुर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच में याचिका दायर कर दी है। यह याचिका पीएस जीएडी कार्मिक के खिलाफ लगाई गई है। ईओडब्ल्यू से संबंधित पत्राचार के दस्तावेज उपलब्ध हैं।
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