रेखा गुप्ता ने वैश्य महासम्मेलन में साझा किए अपने संघर्षों और सफलता के अनुभव
रेखा गुप्ता : गुरुवार 6 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने विचार साझा किए. कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने वैश्य समाज के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि उन्हें जो आशीर्वाद और समर्थन मिला, उससे पूरा समाज गर्व महसूस कर रहा है. उन्होंने अपने संघर्षों और सफलता की कहानी सुनाते हुए बताया कि वे दिल्ली यूनिवर्सिटी की पहली वैश्य समाज की बेटी थीं, जो प्रेसिडेंट बनीं.
रेखा गुप्ता ने याद किया कि जब उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया, तो उनकी मां ने इसे बनियों के लिए सही नहीं माना, लेकिन पिता ने उनका पूरा साथ दिया. उन्होंने कहा, अगर हर घर में ऐसे पिता होंगे, तो बेटियों को सम्मान और अवसर मिलना शुरू हो जाएगा.
समाज के उत्थान के लिए संकल्प
सीएम ने कहा कि वैश्य समाज की बेटियां आगे आकर नेतृत्व करेंगी और समाज की प्रतिष्ठा बढ़ाएंगी. उन्होंने अपने कार्यकाल में ईमानदारी और समाजसेवा को प्राथमिकता देने की बात कही. उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा, "कहीं भी दामन पर दाग नहीं होना चाहिए, बल्कि निस्वार्थ भाव से समाज के लिए काम करना चाहिए."
उन्होंने घोषणा की कि मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर एक बोर्ड लगाया जाएगा, जिस पर लिखा होगा – "आशीर्वाद ही बहुत है, कोई चीज लाने की जरूरत नहीं है." इसके जरिए उन्होंने पारदर्शिता और सेवा भाव का संदेश दिया.
दिल्ली के विकास को लेकर प्रतिबद्धता
उन्होंने अपने संबोधन में दिल्ली के विकास की चुनौतियों पर बात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख किया. उन्होंने कहा, "दिल्ली को विकसित बनाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है और यह सिर्फ समारोहों में शामिल होने से नहीं होगा, बल्कि हमें जमीन पर काम करना पड़ेगा. उन्होंने यह भी कहा कि जब भविष्य में किसी वैश्य समाज के व्यक्ति को नेतृत्व का मौका मिलेगा, तो जनता को भरोसा होगा कि वह अच्छा काम करेगा. इससे समाज की ब्रांडिंग भी होगी और उसकी पहचान मजबूत होगी.
व्यापारियों से संवाद और भविष्य की योजनाएं
रेखा गुप्ता ने बजट सेशन के दौरान व्यापारियों से चर्चा करते हुए उनसे सीधा सवाल किया, "क्या लाए हो और क्या ले जाओगे?" उन्होंने आश्वासन दिया कि दिल्ली के व्यापार और विकास को बढ़ाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है. अंत में उन्होंने समाज से अपील की, "ऐसा ही आशीर्वाद बनाए रखें. आपकी बेटी पूरे विश्व में आपका नाम रोशन करे, यही आशीर्वाद दें." उनके इस संबोधन से वैश्य समाज में एक नई ऊर्जा और विश्वास की लहर दौड़ गई. उनका कहना है कि वे सिर्फ पद पर बैठने नहीं आईं, बल्कि समाज और दिल्ली के विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करेंगी.
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