दुबई में गुरु नानक दरबार गुरुद्वारे में हुआ अंतरधार्मिक रोजा इफ्तार का आयोजन
बई में आपसी भाईचारे की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली. गुरु नानक दरबार गुरुद्वारे में इंटरफेथ इफ्तार (अंतरधार्मिक रोजा इफ्तार) का आयोजन किया गया. इस इफ्तार में केवल शाकाहारी भोजन परोसा गया और इसमें कई धर्मों से जुड़े 275 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया. इस आयोजन का उद्देश्य सांप्रदायिक सौहार्द और शांति का संदेश देना था.
यह इफ्तार खास इसलिए था क्योंकि इसमें सभी धर्मों के लोग एकसाथ शामिल हुए. आयोजन स्थल में प्रवेश करने से पहले सभी लोगों ने अपने जूते बाहर उतारे और सिर को ढका. इस आयोजन में सरकारी अधिकारी, धार्मिक नेता, राजनयिक और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल हुए. गुरुद्वारे के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह कंधारी ने बताया कि यह आयोजन यूएई की धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है.
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल
इस इफ्तार की एक और खास बात यह रही कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपने हिंदूओं के सम्मान में नॉनवेज से परहेज किया और केवल शाकाहारी भोजन ही किया. यह कदम हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी सम्मान को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा संदेश देता है.
गुरुद्वारे के अध्यक्ष ने कहा कि हम इस इफ्तार से शांति, प्रेम और मानवता का संदेश फैलाना चाहते हैं. यह आयोजन यूएई शासकों का आभार व्यक्त करने और मुस्लिम समुदाय के लिए प्रार्थना करने का अवसर भी है. इस आयोजन का स्पेशल महत्व इस साल घोषित ‘कम्युनिटी ईयर’ से भी जुड़ा है, जिसका उद्देश्य सभी समुदायों को साथ लाना है.
गुरुद्वारे की सेवा भावना
दुबई का यह गुरुद्वारा सेवा और सामुदायिक कार्यों के लिए जाना जाता है. यहां तीन समय का लंगर (मुफ्त भोजन सेवा) दिया जाता है, जिसमें किसी की जाति, धर्म या राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता. यह गुरुद्वारा सामाजिक सेवा और सामुदायिक एकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
इस कार्यक्रम में प्रमुख अमीराती नागरिक और पूर्व यूएई राजनयिक मिर्जा अल सायेघ भी शामिल हुए. उन्होंने कहा कि हर बार जब मैं इस इफ्तार में शामिल होता हूं, तो मुझे एहसास होता है कि सभी धर्म शांति और सद्भाव की बात करते हैं. यह आयोजन यूएई और भारत के रिश्तों को भी मजबूत बनाता है.
भारतीय कौंसुल जनरल ने की सराहना
दुबई में भारतीय कौंसुल जनरल सतीश कुमार सिवन ने इस इफ्तार की सराहना की और कहा कि गुरुद्वारे द्वारा इतने सालों से किए जा रहे इस आयोजन से सहिष्णुता, समावेशिता और मानवता की भावना मजबूत होती है. भारत और यूएई, दोनों ही देशों में विविधता और सहिष्णुता को प्राथमिकता दी जाती है.
अमेरिकी नागरिक भी बने हिस्सा
इस आयोजन में अबू धाबी से आए अमेरिकी नागरिक स्टीवन एरिक्सन ने भी भाग लिया. उन्होंने बताया कि वे पिछले साल से इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं और इसे लेकर उत्साहित हैं. उन्होंने कहा कि हम गुरुद्वारे के साथ कई सामुदायिक सेवा कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं. यहां सिर पर पगड़ी पहनना और जूते उतारना कोई असुविधा नहीं, बल्कि एक सम्मान की बात है.
धर्म से ऊपर इंसानियत का संदेश
इस अनोखे आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि धर्म से ऊपर *इंसानियत और भाईचारा होता है. यह इफ्तार न सिर्फ हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देता है, बल्कि यूएई में धार्मिक सद्भाव और सहिष्णुता का भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश करता है
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