दिल्ली दंगा केस: ठोस सबूत नहीं मिलने पर कोर्ट ने 11 आरोपियों को छोड़ा
नई दिल्ली: दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने दिल्ली दंगे 2020 के दौरान गोकुलपुरी इलाके में एक मेडिकल शॉप में लूटपाट और आगजनी के मामले में 11 आरोपियों को बरी किया. कड़कड़डूमा कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए 11 लोगों को बरी कर दिया है. एडिशनल सेशंस जज पुलस्त्य प्रमाचल ने कहा कि मामले में आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए.
कोर्ट ने जिन आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया है, उनमें अंकित चौधरी ऊर्फ फौजी, सुमित ऊर्फ बादशाह, पप्पू, विजय अग्रवाल, आशीष कुमार, सौरभ कौशिक, भूपेंद्र पंडित, शक्ति सिंह, सचिन कुमार ऊर्फ रैंचो, राहुल और योगेश शर्मा शामिल हैं. दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस मामले में 3 मार्च 2020 को शिकायतकर्ता मोहम्मद इमरान शेख की शिकायत पर गोकलपुरी थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी.
शिकायत में इमरान शेख ने कहा था कि गोकलपुरी मेन रोड में उसकी दवा की दुकान थी. उसकी दवा की दुकान का नाम क्राऊन मेडिकोज था. 24 फरवरी 2020 को दिल्ली दंगे के दौरान लूट और आगजनी की गई थी. जहां दुकान थी उसकी पहली और दूसरी मंजिल पर दवाईयां रखी हुई थीं. इमरान शेख की दवा दुकान के सामने एक सैलून में काम करने वाले असलम ने रात के डेढ़ बजे उसे फोन कर बताया कि उसकी दूकान में आग लगा दी गई है और लूटपाट की गई है.
दिल्ली पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 380 और 427 के तहत एफआईआर दर्ज किया. सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 12 गवाहों के बयान दर्ज किए थे. बता दें कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और करीब दो सौ लोग घायल हो गए थे.
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