भारत FATF में पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में धकेलने के लिए पेश करेगा ठोस सबूत!
भारत फाइनैंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की आगामी बैठक में एक डॉजियर (विस्तृत जानकारी वाला दस्तावेज) प्रस्तुत कर मांग करेगा कि पाकिस्तान को एक बार फिर तथाकथित ग्रे लिस्ट वाली श्रेणी में डाला जाए। यह जानकारी एक सरकारी अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर दी। अधिकारी ने कहा, ‘भारत पाकिस्तान की गलतियों को रेखांकित करेगा मसलन धन की वापसी, आतंकियों को पनाह देना, विकास कार्यों के लिए मिले फंड से हथियार खरीदना आदि। पाकिस्तान अपने वादे के मुताबिक आतंकवाद निरोधक (संशोधन विधेयक 2020) जैसे कानून पारित कर पाने में भी नाकाम रहा है। एफएटीएफ द्वारा उसे दोबारा ग्रे लिस्ट में डाला जाना चाहिए।’
वैश्विक निगरानी संस्था देशों को उस समय ग्रे लिस्ट में डालती है जब उसे उनकी रणनीतिक कमियों का पता चलता है। उदाहरण के लिए कमजोर मनी लॉन्डरिंग विरोधी ढांचा, आतंकियों को आर्थिक मदद से निपटने में नाकामी आदि। पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने का परिणाम विदेशी निवेश में कमी, उच्च उधारी लागत और दूसरे देशों की ओर से कठोर वित्तीय नियमन आदि के रूप में सामने आ सकता है।
पाकिस्तान को 2022 में इस सूची से बाहर किया गया था जब उसने अपने मनी लॉन्डरिंग विरोधी (एएमएल) और आतंक विरोधी फाइनैंसिंग (सीएफटी) ढांचे की कमियां दूर करने के मामले में सुधार दिखाया था।
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सैन्य और आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान के खिलाफ घेराबंदी तेज कर दी है। हालांकि अधिकारी ने कहा कि सरकार को चालू वित्त वर्ष में रक्षा व्यय में कोई ‘बड़ी अतिरिक्त मांग’ नहीं नजर आ रही है। अधिकारी ने कहा, ‘रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र बलों को आपात खरीद अधिकार दिए हैं। देश की रणनीतिक जरूरतें कभी अधूरी नहीं छोड़ी जाएंगी।’ अधिकारी ने कहा कि भारत पाकिस्तान द्वारा विश्व बैंक के समक्ष पेश किए जाने वाले ऋण प्रस्ताव का भी विरोध करेगा।
अधिकारी ने कहा, ‘जब तक पाकिस्तान कोई कदम नहीं उठाता, हम आवाज उठाते रहेंगे।’ भारत ने गत 9 मई को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की बोर्ड बैठक में भी पाकिस्तान द्वारा प्रस्तुत नए ऋण प्रस्ताव का भी विरोध किया था हालांकि आईएमएफ ने उसे एक अरब डॉलर का ऋण मंजूर कर दिया था क्योंकि पाकिस्तान सभी तकनीकी जरूरतों को पूरा कर रहा था।
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