पर्यावरण पर खतरा: महुरेना बीट में सैकड़ों पेड़ों की छाल निकाली गई
लखीमपुर खीरी जिले में जंगल के पेड़ों को सुखाने के लिए लकड़हारे अलग-अलग हथकंडे अपना रहे हैं। जिसमें छाल छीलकर धीरे-धीरे पेड़ सुखा देने का तरीका काफी पुराना है। ऐसा ही एक मामला महुरेना बीट के जंगल का प्रकाश में आया है। इसी कारण आबादी के नजदीकी जंगल का क्षेत्र निरंतर काम होता जा रहा ह
मैलानी वन रेंज की महुरेना बीट में असौवा गांव के नजदीकी जंगल में सैकड़ों पेड़ों की जड़ से करीब पांच फीट की ऊंचाई तक तने की छाल निकाल दी गई है। जंगल में इसी तरीके से कई पेड़ सुखा हुए भी खड़े हैं। इस तरह से छिले पेड़ दूर से ही दिखाई देते हैं। जबकि वन विभाग की ओर जंगल की सुरक्षा के लिए आबादी के नजदीकी क्षेत्र में व्यापक गस्त करने का निर्देश है।
जिम्मेदारों ने क्या कहा
जिसमें वनरक्षक (वाचर), फॉरेस्ट गार्ड को नियमित रिपोर्ट देनी होती है। हालांकि वन विभाग के कर्मचारी चरवाहों का कृत्य बता रहे हैं। जबकि जानकारों का कहना है कि लकड़हारे पेड़ सुखाने के लिए सबसे आसान तरीका अपनाते हैं। जिसमें गहराई से छाल निकल देने के बाद पेड़ धीरे-धीरे सूख जाता है। रेंजर साजिद अली ने बताया कि दिखवाते हैं कि मामला क्या है। वहीं डिप्टी रेंजर संत त्रिपाठी ने कहना है कि सर्दी में चरवाहे आग तपने के लिए पेड़ों की छाल छील ले जाते हैं।
राशिफल 07 मई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
जनजातीय खिलाड़ियों के लिए शानदार मंच साबित हुआ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स
सुशासन तिहार 2026: अंजनी साहू के लिए बना राहत और खुशी का जरिया
रेलवे–पुलिस–प्रशासन के समन्वय से सुनियोजित भीड़ प्रबंधन, कड़ी सुरक्षा और आधारभूत ढांचे के साथ होगा सिंहस्थ 2028 का सफल आयोजन - डीजीपी मकवाणा
उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया की प्रगति की गहन समीक्षा की
प्रभारी सचिव ने शासकीय महाविद्यालय धनोरा के निर्माणाधीन भवन का निरीक्षण किया
भक्ति की महायात्रा : रामलला के दर्शन को रायपुर से रवाना हुए 850 श्रद्धालु
टीकमगढ़ के डायल 112 हीरोज
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से ग्रीनको ग्रुप के कार्यकारी निदेशक बंडारू ने की भेंट
पीएम जनमन योजना के तहत एमएमयू से सुदृढ़ हो रही स्वास्थ्य सेवाएं