ईरान 400 किलोग्राम यूरेनियम से बना सकता है कितने बम....
नई दिल्ली। ईरान पर फिर से अंतरराष्ट्रीय नजरें टिक गई हैं, जब यह जानकारी सामने आई कि उसके पास करीब 400 किलोग्राम हथियार-ग्रेड यूरेनियम है। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बावजूद ईरान ने इस यूरेनियम को कथित तौर पर छिपा रखा है। यह खुलासा अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसियों और खुफिया रिपोर्टों के हवाले से किया गया है।
परमाणु विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी मात्रा में यूरेनियम से 7 से 14 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि बम का डिज़ाइन आधुनिक है या पारंपरिक।
क्या है हथियार-ग्रेड यूरेनियम?
परमाणु बम बनाने के लिए यूरेनियम-235 (यू-235) की उच्च शुद्धता जरूरी होती है। प्राकृतिक यूरेनियम में केवल 0.7 प्रतिशत यू-235 होता है। हथियार-ग्रेड यूरेनियम में यू-235 की शुद्धता 90 प्रतिशत या उससे अधिक होती है। ईरान के पास मौजूद 400 किलोग्राम यूरेनियम को अगर हथियार-ग्रेड माना जाए, तो इसमें 360 किलोग्राम शुद्ध यू-235 मौजूद होगा।
कितने बम बन सकते हैं?
बम बनाने के लिए जरूरी यूरेनियम की मात्रा उसके डिज़ाइन पर निर्भर करती है:
पुराने डिज़ाइन (जैसे हिरोशिमा का लिटिल बॉय): 50–60 किलोग्राम यूरेनियम प्रति बम
आधुनिक डिज़ाइन: केवल 15–25 किलोग्राम यूरेनियम प्रति बम
मान लें कि औसतन 25 किलोग्राम यूरेनियम प्रति बम लगेगा, तो: 360 ÷ 25 = 14.4 बम यानी ईरान 14 आधुनिक परमाणु बम बना सकता है।
अगर पुराने डिज़ाइन की बात करें, तो: 360 ÷ 50 = 7.2 बम यानी करीब 7 पारंपरिक बम बन सकते हैं।
क्या हो सकता है इन बमों का असर?
छोटे बम (0.1–10 किलोटन): युद्ध के मैदान में उपयोग, 1–2 किमी तक की तबाही।
मध्यम बम (10–100 किलोटन): शहरों को नष्ट करने वाले, 2–5 किमी तक विनाश।
बड़े बम (100 किलोटन–50 मेगाटन): थर्मोन्यूक्लियर बम, 10 किमी से अधिक दायरे में तबाही।
यही कारण है कि ईरान द्वारा 400 किलोग्राम हथियार-ग्रेड यूरेनियम छिपाए जाने को लेकर दुनियां के अमीर देश खासे परेशान हो रहे हैं और इसे पश्चिम एशिया समेत पूरी दुनिया में अस्थिरता का कारण बता रहे हैं।
वनाधिकार पट्टा और पीएम आवास से मुरिया परिवार को मिला नया जीवन
वर्मी कंपोस्ट उत्पादन बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल
राज्यपाल पटेल से भारतीय विदेश सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी मिले
मध्यप्रदेश को सामाजिक न्याय के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के लिये करें समन्वित प्रयास : मंत्री कुशवाह
लेमनग्रास -किसानों के लिए कम पानी में ज्यादा कमाई का साधन
चेकडैम बना ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार, जल संरक्षण से बदली खेती की तस्वीर
कौशल और सामाजिक उद्यमिता से होगा भारत विकसित : राज्यपाल पटेल
द्वारका नगरी योजना से शहरी विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से बदली तस्वीर