4 दिसंबर को नौसेना दिवस तिरुवनंतपुरम में, दिखेगी भारतीय समुद्री शक्ति की झलक
भारतीय नौसेना इस वर्ष 4 दिसंबर को नौसेना दिवस 2025 तिरुवनंतपुरम में मनाएगी. अरब सागर के किनारे स्थित इस शहर को लंबे विचार-विमर्श के बाद चुना गया है. यह निर्णय सरकार की उस पहल के अनुरूप लिया गया है जिसके तहत देश के विभिन्न हिस्सों में महत्वपूर्ण दिवसों का आयोजन किया जा रहा है. हर साल 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाता है ताकि ऑपरेशन ट्राइडेंट के दौरान भारतीय नौसेना की भूमिका को याद किया जा सके.
यह ऑपरेशन अपनी सटीकता, साहसिक क्रियान्वयन और युद्ध के परिणाम पर पड़ने वाले शक्तिशाली प्रभाव के लिए जाना जाता है. इस वर्ष के आयोजन में तिरुवनंतपुरम के मनोरम तट पर व्यापक परिचालन प्रदर्शन और तमाम जन-संपर्क गतिविधियां शामिल होने की उम्मीद है. ये कार्यक्रम जनता को भारत की समुद्री सेनाओं की शक्ति और मिशन की बेहतर समझ प्रदान करेंगे और साथ ही भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमताओं और तत्परता का भी प्रदर्शन करेंगे.
इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के चार जहाज डुबोए थे, जिनमें पीएनएस खैबर भी शामिल था. ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह भारतीय नौसेना का एक बड़ा सार्वजनिक आयोजन होगा, जब नौसेना अरब सागर में पाकिस्तान के खिलाफ आक्रामक अभियान के लिए पूरी तरह तैयार थी. नौसेना दिवस 2024 ओडिशा के पुरी में मनाया गया था.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद ये आयोजन अहम
वहीं, महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2023 नौसेना दिवस समारोह में हिस्सा लिया था. ऐतिहासिक सिंधुदुर्ग किले के पास आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रभावशाली नौसैनिक प्रदर्शनों के लिए एक नाटकीय पृष्ठभूमि प्रदान की और नौसेना की रणनीतिक तैयारियों के साथ-साथ भारत के पश्चिमी तट की समृद्ध समुद्री विरासत के बारे में जागरूकता बढ़ाई. साथ ही ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका के बाद नौसेना दिवस 2025 और भी महत्वपूर्ण हो जाता है.
इस हालिया ट्राई-सर्विस प्रतिक्रिया के दौरान भारतीय थलसेना और वायुसेना ने गतिशील अभियान चलाए, जबकि नौसेना अरब सागर में पूरी तरह तैयार रही. 35 से ज्यादा युद्धपोतों, पनडुब्बियों, समुद्री गश्ती विमानों और हवाई पूर्व चेतावनी प्रणालियों की तैनाती के साथ विमानवाहक युद्धपोत आईएनएस विक्रांत के नेतृत्व में नौसेना ने तनाव को बढ़ने से रोकने में अहम भूमिका निभाई.
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