जयशंकर का बयान: पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की बातचीत का दावा पूरी तरह झूठा
कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा, कुछ लोग चीनी राजदूत से ट्रेनिंग लेते
नई दिल्ली। राज्यसभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की विदेश और रक्षा नीति पर विपक्ष के सवालों का दो टूक जबाव दिया। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारतीय सेना ने निर्धारित लक्ष्यों पर सटीक कार्रवाई की और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर दुनिया के किसी भी नेता ने भारत पर दबाव नहीं बनाया। इसी दौरान विदेश मंत्री जब संसद में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर जवाब दे रहे थे, तभी विपक्षी नेता हंगामा करने लगे। इस दौरान विपक्ष के नेताओं को टोकते हुए कहा, मैं उन्हें बताना चाहता हूं, वे कान खोलकर सुन लें। 22 अप्रैल से 16 जून तक, एक बार भी प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बातचीत नहीं हुई थी।
उन्होंने कहा कि अमेरिका, सऊदी अरब और अन्य देशों से जो भी संवाद हुआ, वह पूरी तरह पारदर्शी और रिकॉर्ड में है। उन्होंने कहा कि भारत ने स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान यदि संघर्ष विराम चाहता है, तब हमारे डीजीएमओ चैनल से संवाद करना होगा।
चीन और पाकिस्तान को लेकर विपक्ष पर हमला बोलकर जयशंकर ने कहा कि भारत की कूटनीतिक सफलता इससे साबित होती है कि यूएनएससी में भारत भले ही स्थायी सदस्य न हो, लेकिन सुरक्षा परिषद प्रमुख का बयान भारत के पक्ष में आया। रूस सहित कई देशों ने भारत के बयान का समर्थन किया।
उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, जो लोग मुंबई आंतकी हमलों पर चुप रहे थे, आज वे हमें ज्ञान दे रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि भारतीय सेना को किसी के समर्थन की जरूरत नहीं है, सेना ने आतंकियों के ठिकानों पर खुद ही सफलतापूर्वक कार्रवाई की है। उन्होंने नूर खान एयरबेस सहित कई आतंकवादी और सैन्य ठिकानों पर की गई तबाही का जिक्र कर कहा कि सेना का श्रेय किसी और को देना उसका अपमान होगा।
चीन-पाकिस्तान संबंधों पर उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ नेता ‘ओलंपिक की क्लासरूम’ में जाकर चीन का ज्ञान लेकर आए हैं और चीनी राजदूत से ‘ट्यूशन’ लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 2006 में कांग्रेस सरकार ने हू जिंताओ की यात्रा के दौरान चीनी कंपनियों को 3जी और 4जी जैसे क्षेत्रों में आमंत्रित कर देश की सुरक्षा से समझौता किया।
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