कॉपर पर 50% शुल्क से अमेरिकी उत्पादन पर खतरा, रिपोर्ट ने जताई चिंता
व्यापार : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अर्ध-निर्मित तांबे और तांबा आधारित उत्पादों के आयात पर 1 अगस्त से 50 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगाने का फैसला अमेरिकी उद्योगों पर ही भारी पड़ सकता है। थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने यह दावा किया है। जीटीआरई का कहना है कि यह फैसला आयात निर्भरता कम करने के बजाय अमेरिकी घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंचा सकता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हावला देते हुए अमेरिका ने लगाया टैरिफ
अमेरिका ने व्यापरा विस्तार अधिनियम की धार 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हावला देते हुए यह बड़ा फैसला किया है। इस कदम को 29 जुलाई, 2025 को जारी राष्ट्रपति की घोषणा के जरिए औपचारिक रूप दिया। इस निर्णय का उद्देश्य विदेशी तांबे पर निर्भरता को कम करना है। इसके बारे में अमेरिका का दावा है कि यह रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण घरेलू क्षेत्रों के लिए खतरा पैदा करता है।
अमेरिका है कच्चे माल पर निर्भर
जीटीआरआई का अनुमान अमेरिकी दावों से विपरीत है। उनके अनुसार तांबा इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), पावर ग्रिड, अर्धचालकों और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए एक आधारभूत कच्चा माल है। रिपोर्ट में कहा गया कि इनपुट लागत में अचानक 50% की वृद्धि से इन क्षेत्रों में प्रभाव पड़ेगा, उत्पादन धीमा हो जाएगा, कीमतें बढ़ेंगी और अमेरिका में स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को नुकसान पहुंचेगा।
वित्त वर्ष25 में भारत ने यूएस को 360 मिलयन डॉलर का तांबे का किया निर्यात
भारत ने वित्त वर्ष 2025 में अमेरिका को 360 मिलियन डॉलर मूल्य के तांबे के उत्पादों का निर्यात किया। इसमें प्लेट, ट्यूब और अन्य अर्ध-तैयार उत्पाद शामिल हैं। इसमें कहा गया कि ये शिपमेंट अब ज्यादा महंगे होंगे। हालांकि टैरिफ सभी देशों पर समान रूप से लागू होता है, जिसमें जापान और यूरोपीय संघ जैसे सहयोगी देश भी शामिल हैं। इससे वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं के बीच समान अवसर पैदा होते हैं। भारत को दूसरों की तुलना में किसी विशेष नुकसान का सामना करने की संभावना नहीं है।
अमेरिका के डाउनस्ट्रीम उद्योगों को होगा नुकसान
इसके अलावा, जीटीआरआई का मानना है कि भारत के तांबा व्यापार पर इसका प्रभाव सीमित होगा। अपने घरेलू क्षेत्र की रक्षा करने की कोशिश में, अमेरिका अपने डाउनस्ट्रीम उद्योगों को दंडित करने का जोखिम उठा रहा है। नया टैरिफ न्यूनतम रणनीतिक लाभ तो लाएगा, लेकिन आर्थिक रूप से अमेरिका को काफी नुकसान पहुंचाएगा। खासकर ऐसे समय में जब तांबा अमेरिकी औद्योगिक भविष्य के लिए पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
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