उमरिया में टूटी उम्मीदें, महिलाओं ने सड़क पर बोया धान, कहा- ‘यही है विकास’
उमरिया। अगर सड़क नहीं बनी, तो हम यहीं खेती करेंगे... ये शब्द सिर्फ नाराज़गी नहीं, बल्कि बड़खेड़ा ग्राम की पीड़ा और जमीनी हकीकत की झलक है। मानपुर से महज 9 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव इन दिनों एक अनोखे विरोध प्रदर्शन को लेकर चर्चा में है। गांव की महिलाओं ने कीचड़ से सनी सड़क पर ही धान की रोपाई कर प्रशासन को आईना दिखाया है। बड़खेड़ा के समहा टोला और चौधिराईंन मोहल्ला के लोग वर्षों से टूटी-फूटी, कीचड़ में डूबी सड़कों से जूझ रहे हैं। बारिश के मौसम में ये रास्ते दलदल में तब्दील हो जाते हैं। हालत यह है कि ज़रूरी काम हो तब भी लोग घर से बाहर निकलने से कतराते हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई, जिससे तंग आकर गांव की महिलाओं ने सोमवार सुबह सड़क पर ही धान के बिचड़े रोपकर विरोध जताया।
स्थानीय महिला मीना सिंह बताती हैं, बरसों से हम सड़क की मांग कर रहे हैं। हर बार पंचायत और जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ आश्वासन देकर निकल जाते हैं। न सरपंच सुनते हैं न सचिव को फर्क पड़ता है। अब हमारी सहनशक्ति खत्म हो चुकी है। इसलिए हमने सड़क को ही खेत बना दिया। इस विरोध का उद्देश्य केवल सड़क की समस्या उठाना नहीं था, बल्कि इसके जरिए पंचायत की समग्र उदासीनता को उजागर करना था। गांव में शासकीय प्राथमिक विद्यालय भी बदहाली का शिकार है। बच्चों के लिए शौचालय की सुविधा नहीं है, जिसके कारण छात्र-छात्राओं को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। यह स्थिति न सिर्फ अस्वास्थ्यकर है, बल्कि बच्चों की गरिमा और सुरक्षा के लिए भी खतरा है।
गांव के युवाओं ने इस प्रदर्शन का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। वीडियो में महिलाएं पानी और कीचड़ से भरी सड़क पर रोपाई करती नजर आती हैं, जो व्यवस्था की विफलता पर एक गहरा व्यंग्य है। वीडियो के ज़रिए ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन है। यदि जल्द ही समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे उग्र आंदोलन की ओर बढ़ेंगे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि पंचायत को यदि अब भी नींद नहीं खुली, तो वे जिला मुख्यालय में धरना देंगे और ज़िला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे।
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