भ्रष्टाचार पर बड़ी कार्रवाई: इंदौर में थाना प्रभारी और ASI का हुआ डिमोशन, पहुंचे आरक्षक पद पर
इंदौर। इंदौर पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने भ्रष्टाचार के गंभीर मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो पुलिसकर्मियों को पदावनत (डिमोट) कर दिया है. यह कार्रवाई करीब दो साल चली विभागीय जांच के बाद की गई है. मामला एमआईजी थाना क्षेत्र का है, जहां वर्ष 2022 में एक महिला ने रवि नामक व्यक्ति पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था. जांच में सामने आया कि कारोबारी से थाना प्रभारी अजय वर्मा और एएसआई धीरज शर्मा ने मामले को दबाने और समझौता करवाने के लिए बीस लाख रुपए की रिश्वत ली थी.
पुलिसकर्मियों का हुआ डिमोशन
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस विभाग ने इस पूरे प्रकरण की आंतरिक जांच शुरू की, जो लगभग दो वर्षों तक चली. जांच रिपोर्ट में दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए. इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने सख्त कदम उठाते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी अजय वर्मा को उनके वर्तमान पद से घटाकर दो साल के लिए सब-इंस्पेक्टर बना दिया, जबकि एएसआई धीरज शर्मा को पांच साल के लिए आरक्षक के पद पर पदावनत (डिमोट) किया गया. जानकारी के अनुसार, 3 मार्च 2022 को कॉन्स्टेबल गोविंद द्विवेदी के जरिए महिला का आवेदन थाने पहुंचा था, जिसे टीआई अजय वर्मा और एएसआई धीरज शर्मा को मार्क किया गया. उन्होंने कानूनी प्रक्रिया अपनाने के बजाय सीधे व्यापारी को थाने बुलाकर दबाव बनाया कि अगर मामला यहीं सुलटा दिया जाए तो महिला रिपोर्ट दर्ज नहीं करेगी. व्यापारी ने डरकर बीस लाख रुपए दे दिए, जिसके बाद मामले को वहीं दबा दिया गया. शिकायत मिलने के बाद एसीपी भूपेंद्र सिंह ने जांच की, जिसमें पता चला कि महिला की शिकायत फर्जी थी और पुलिसकर्मियों ने साजिश के तहत व्यापारी से धनराशि वसूली थी. इसके बाद मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा और पुलिस कमिश्नर ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी पाए गए दोनों अधिकारियों को पदावनत (डिमोट) कर दिया.
भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई कार्रवाई
कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जनता के भरोसे को बनाए रखना पुलिस की पहली जिम्मेदारी है, और जो अधिकारी इस विश्वास से खिलवाड़ करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. यह कार्रवाई इंदौर पुलिस में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा है. बीते 15 दिनों में यह पांचवां मामला है जब कमिश्नर ने भ्रष्ट आचरण में लिप्त पुलिसकर्मियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है. इससे पहले भी कई एएसआई और एसआई को बर्खास्त या डिमोट किया जा चुका है. इस घटनाक्रम ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है और इसे ईमानदारी व पारदर्शिता की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है.
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