इशाक डार ने रखी सार्क की जगह एक नई रीजनल बॉडी बनाने की मांग
इस्लामाबाद,। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने लंबे समय से बंद दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की जगह एक नई रीजनल बॉडी बनाने की मांग प्रमुखता से उठाई है। इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज इस्लामाबाद (आईएसएसआई) में आयोजित कार्यक्रम में डार ने इशारों ही इशारों में भारत को धमकाने का काम भी कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि दक्षिण एशिया अब जीरो-सम माइंडसेट, पॉलिटिकल फ्रैगमेंटेशन और खराब रीजनल आर्किटेक्चर में फंसा नहीं रह सकता।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री डार का कहना है, कि पाकिस्तान खुला और सभी को साथ लेकर चलने वाला रीजनलिज्म चाहता है। उन्होंने सार्क के बाहर उभरते मल्टीलेटरल प्लेटफॉर्म के लिए पाकिस्तान के समर्थन का जिक्र किया। डार ने कहा कि इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन ने कॉमन इंटरेस्ट के एरिया में आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक ट्राइलेटरल मैकेनिज्म बनाया है। यह मैकेनिज्म खास तौर पर भारत के खिलाफ बनाया है, जिससे बांग्लादेश पहले ही किनारा कर चुका है। यहां पर डार ने भारत का परोक्ष जिक्र किया और कहा, इस कॉन्सेप्ट को बढ़ाया और दोहराया जा सकता है। जैसा कि मैंने पहले कहा है, इकोनॉमी से लेकर रीजनल प्रायोरिटी तक के मुद्दों पर अलग-अलग ज्योमेट्री वाले ग्रुप्स को किसी की सख्ती का बंधक नहीं बनाया जा सकता और न ही बनाया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि हाल ही में कुनमिंग में पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश की तीन तरफा मीटिंग हुई, जो अपनी तरह की पहली मीटिंग थी। यहां चल रही बातचीत में एक अहम कदम था। सार्क को कभी दक्षिण एशिया का ईयू माना जाता था। यह संगठन 2016 से निष्क्रिय है। उस साल भारत में हुए आतंकी हमलों में पाकिस्तान का हाथ होने के कारण भारत ने इस्लामाबाद में होने वाले शिखर सम्मेलन का बॉयकॉट किया था। उस समय शेख हसीना के नेतृत्व में बांग्लादेश ने भी ऐसा ही किया था। अपने भाषण में, पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने साउथ एशियन देशों से इतिहास के बोझ से बाहर निकलने और सिक्योरिटी, इकॉनमी, क्लाइमेट अडैप्टेशन और कनेक्टिविटी में कोऑपरेशन करने की अपील की। उन्होंने मई में हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र कर कहा कि यह ऐसा सबूत है, जो बताता है कि यह क्षेत्र कितना नाजुक बना हुआ है।
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