भोपाल-मढ़ई-पचमढ़ी हेली सेवा पहली उड़ान के बाद अटकी
भोपाल। प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई भोपाल-मढ़ई-पचमढ़ी पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा पहली उड़ान के बाद ही बाधाओं में फंस गई। मंत्रियों और विधायकों को लेकर उड़ान भरने के कुछ ही दिनों बाद यह सेवा बंद करनी पड़ी। इससे पहले उज्जैन-ओंकारेश्वर हेली सेवा भी इसी तरह पहली उड़ान के बाद होल्ड हो चुकी है। अब पचमढ़ी और मढ़ई में नए हेलीपैड तैयार होने के बाद इस सेवा को दोबारा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने 20 नवंबर से पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा का नियमित संचालन शुरू किया था। इस योजना के तहत हेलीकॉप्टर सेवाओं को तीन सेक्टर—आध्यात्मिक, वाइल्डलाइफ और इको-टूरिज्म में विभाजित किया गया। इको-टूरिज्म सेक्टर के अंतर्गत भोपाल-मढ़ई-पचमढ़ी रूट पर हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इको-सेंसिटिव जोन से जुड़े दिशा-निर्देशों के चलते इसे तीसरे ही दिन रोकना पड़ा।
इको-सेंसिटिव जोन में आते हैं हेलीपैड
दरअसल, पचमढ़ी और मढ़ई में बने हेलीपैड नेशनल पार्क के इको-सेंसिटिव जोन में आते हैं, जहां नियमित हवाई संचालन की अनुमति नहीं है। इसी कानूनी अड़चन के कारण सेवा को बंद करना पड़ा। अब इस समस्या के समाधान के लिए पचमढ़ी में मटकूली के नीचे और मढ़ई में सोहागपुर रोड पर नए हेलीपैड बनाने के लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है। इन स्थानों पर निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है।
नया हेलीपैड 25 से 30 किमी दूर होगा
नई व्यवस्था के तहत मढ़ई का हेलीपैड पर्यटन स्थल से लगभग 25 किलोमीटर और पचमढ़ी का हेलीपैड करीब 30 किलोमीटर दूर होगा। ऐसे में हेलीकॉप्टर से उतरने के बाद यात्रियों को सडक़ मार्ग से करीब आधे घंटे का अतिरिक्त सफर तय करना होगा। हालांकि, पर्यटन विभाग की ओर से यात्रियों के लिए वाहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
जनवरी से भोपाल-मढई-पचमढी सेवा शुरू होगी
मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड की कंपनी सेक्रेटरी अंकित कौरव ने बताया कि नए हेलीपैड बनने के बाद भोपाल-मढ़ई-पचमढ़ी हेली सेवा बिना किसी कानूनी बाधा के सुचारू रूप से संचालित की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनवरी से भोपाल से पचमढ़ी के लिए हेलीकॉप्टर सेवा फिर शुरू करने की योजना है। इसके साथ ही भोपाल से चंदेरी और ओरछा को जोडऩे वाले नए हेली रूट पर भी काम किया जा रहा है। पर्यटन बोर्ड का मानना है कि हेली पर्यटन सेवाओं के दोबारा शुरू होने से प्रदेश में इको-टूरिज्म को नई गति मिलेगी और दूरस्थ पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी।
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