मेडिकल मिस्ट्री बना इंदौर का भागीरथपुरा, मौतों का रहस्य बरकरार, 149 का इलाज जारी
इंदौर: देश भर में चर्चा का विषय बन चुका भागीरथपुरा कांड अब एक मेडिकल मिस्ट्री बनकर उभर रहा है. यहां दूषित पानी पीने से प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक 6 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं स्थानीय जनता और कांग्रेस नेता कई लोगों की मौत का दावा कर रहे है. इन मौतों की मुख्य वजह क्या है अभी स्पष्ट नहीं हो सका है, कयास लगाया जा रहा है कि दूषित पानी पीने की वजह से लोगों की तबीयत बिगड़ी है. वहीं केंद्र सरकार की आईसीएमआर, एम्स कोलकाता, एम्स भोपाल सहित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैक्टीरियोलॉजी व अन्य एजेंसियां भागीरथपुरा में सघन सर्वे कर मौतों का कारण जानने में जुटी हुई हैं.
मरने वालों का बढ़ा आंकड़ा
रविवार 4 नवंबर को इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती एक अन्य मरीज की मौत हो गई है. इनका नाम ओमप्रकाश शर्मा (69) है और ये रिटायर्ड पुलिसकर्मी है. 2 दिन पहले जिन 10 गंभीर मरीजों को अलग-अलग निजी अस्पतालों से स्थिति बिगड़ने पर बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. उनमें से एक ओमप्रकाश शर्मा थे. इनकी मौत किडनी फेल होने से बताई जा रही है. वे भागीरथपुरा में रहने वाले अपने बेटे से मिलने आए थे, उन्हें 1 जनवरी को उल्टी-दस्त के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था. किडनी खराब होने के चलते उन्हें आईसीयू और फिर वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन रविवार दोपहर 1 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया. परिजनों का आरोप है कि दूषित पानी ने उनकी किडनी खराब कर दी.
कई मरीज लड़ रहे जिंदगी का जंग
ऐसा आरोप है कि बॉम्बे हॉस्पिटल में अब भी 7 मरीज आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं. जिनमें से 4 अभी भी वेंटिलेटर पर हैं. शहर के 27 अस्पतालों में अब तक कुल 398 मरीज भर्ती किए जा चुके हैं, जिनमें से 256 को डिस्चार्ज कर दिया गया है. बाकी 149 मरीजों का इलाज अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में जारी है. कलेक्टर शिवम वर्मा के मुताबिक रविवार को ओपीडी में 65 मरीज दिखाने आए थे, जिनमें से 15 लोगों को भर्ती करना पड़ा है. उन्होंने बताया अभी भी 14 मरीज आईसीयू में हैं, जिनमें से कुछ लोगों की स्थिति गंभीर बनी हुई है. चाचा नेहरू अस्पताल में 14 बच्चे भी भर्ती हैं."
कई मृतकों का हुआ पोस्टमार्टम
इंदौर स्वास्थ्य विभाग ने अधिकांश संदिग्ध मौत के मामले में किसी का भी पोस्टमार्टम नहीं कराया है. जिसके कारण असामान्य मौत का कारण अब तक सामने नहीं आया, जिनका पोस्टमार्टम कराया गया है, उनकी रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की गई है. वेंटिलेटर पर पहुंच चुके मरीजों की जान खतरे में बनी हुई है. मरीजों की जान बचाने की प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य अमला पूरी कोशिश कर रहा है. इस मामले में शुरुआती दिनों में पानी में जहरीले केमिकल होने के भी कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन जिला प्रशासन ने इस बात से इनकार किया है. कलेक्टर के मुताबिक सभी मृतकों का डेथ एनालिसिस और मेडिकल डेथ ऑडिट कराया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट मिलना बाकी है. उन्होंने बताया अब तक घातक संक्रमण से विभिन्न अस्पतालों में भर्ती 6 मरीजों की मौत हो चुकी है.
सरकार ने झोंके तमाम संसाधन
राज्य सरकार ने भागीरथपुरा के संकट से उबरने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है. राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ स्वास्थ्य विभाग नगर निगम और महिला बाल विकास सहित राजस्व विभाग की सैकड़ों अधिकारियों की टीम जमीन पर उतर कर कार्य कर रही है. कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया, "यहां कार्य सुविधा के लिए अन्य जिलों से एपिडेमियोलॉजिस्ट बुलाए गए हैं, शिशु रोग विशेषज्ञ, औषधि विशेषज्ञ एवं चिकित्सा अधिकारी भी अन्य जिलों सेवाएं देने इंदौर आए हैं. उन्होंने बताया मरीज के लिए कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर 940-650-5508 जारी किया गया है."
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