खंडवा दौरा छोड़ा, दिल्ली पहुंचे जीतू पटवारी—कांग्रेस में सियासी उबाल
भोपाल। संसद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को बोलने से रोके जाने के आरोपों के बीच कांग्रेस में सियासी हलचल तेज हो गई है. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को अचानक दिल्ली तलब किया गया है. दोनों नेता कांग्रेस आलाकमान के साथ अहम रणनीतिक बैठक में शामिल होंगे।
जीतू पटवारी ने किया खंडवा दौरा कैंसिल
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपना प्रस्तावित खंडवा दौरा तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है और वे दिल्ली के लिए रवाना हो चुके हैं. वहीं प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी भी पहले से ही दिल्ली में मौजूद हैं. माना जा रहा है कि यह बैठक राहुल गांधी से जुड़े संसदीय घटनाक्रम और किसानों के मुद्दे पर पार्टी की आगे की रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि संसद में जानबूझकर राहुल गांधी की आवाज दबाई जा रही है और उन्हें किसानों से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाने से रोका गया. पार्टी का कहना है कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और विपक्ष की आवाज को कुचलने की कोशिश की जा रही है।
ट्रेड डील पर कांग्रेस का विरोध
इसी बीच कांग्रेस ने अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को भी किसान विरोधी करार दिया है. पार्टी का आरोप है कि इस समझौते से देश के किसानों के हितों को नुकसान पहुंचेगा और कृषि क्षेत्र पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा. कांग्रेस इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक सवाल बनाने की तैयारी में है।
आंदोलन और धरने की प्लानिंग को लेकर की होगी बैठक में चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी और किसानों के मुद्दे पर देशभर में प्रदर्शन और आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है. किस राज्य में किस तरह का विरोध होगा, संसद से सड़क तक किस तरह संदेश जाएगा. इन सभी बिंदुओं पर कांग्रेस आलाकमान नेताओं के साथ रणनीति साझा करेगा. दिल्ली स्थित कांग्रेस दफ्तर में दोपहर 12 बजे के बाद इस अहम बैठक के शुरू होने की संभावना है।
बैठक के बाद हो सकता है बड़ा ऐलान
बैठक के बाद कांग्रेस के आंदोलन और आगे की राजनीतिक रणनीति को लेकर बड़ा ऐलान भी किया जा सकता है. मध्य प्रदेश के लिहाज से यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि राज्य कांग्रेस को राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका सौंपी जा सकती है. जीतू पटवारी और हरीश चौधरी की मौजूदगी से साफ है कि पार्टी इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाने जा रही है।
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