अलग धर्म कोड नहीं मिला तो आंदोलन, अमरकंटक से उमंग सिंघार की चेतावनी
भोपाल।मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासी समुदाय के अलग धर्म कोड की मांग को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है. आदिवासी समुदाय को लेकर उमंग सिंघार ने कहा कि समय आ गया है कि हम सभी आदिवासी एकजुट हों. यदि अभी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के आदिवासी समाज ने अपने अलग धर्म कोड की मांग के लिए अधिक से अधिक आवेदन नहीं भेजे, तो हमारी पहचान को किसी अन्य धर्म की श्रेणी में दर्ज कर दिया जाएगा. सिंघार ने आगे कहा कि मैं अपने सभी आदिवासी भाई-बहनों से आग्रह करता हूं कि बड़ी संख्या में धर्म कोड की मांग के समर्थन में फॉर्म भरकर राष्ट्रपति महोदया तक अपनी आवाज़ पहुंचाएं, ताकि हमारी सांस्कृतिक पहचान और परंपरा को उचित मान्यता मिल सके।
पहले भी दिया भगवान राम को लेकर बड़ा बयान
ऐसा नहीं है नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पहली बार आदिवासी समुदाय को लेकर इस तरह की आवाज उठाई हो. इससे पहले भी सिंघार ने आदिवासी अधिकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि भगवान हनुमान और भगवान राम की वानर सेना आदिवासी ही थे। सिंघार ने आगे कहा कि ”रामायण में राम जी की सेना की बात होने लगी तो आदिवासियों को वानर बना दिया. रामायण में कहा गया कि जंगल के अंदर एक शबरी मिली थी जो राम को बेर खिलाती है, इसका मतलब क्या एक ही आदिवासी थी पूरे जंगल में? नहीं, जितने भी लोग सेवा में राम के साथ थे, सब आदिवासी थे. राम को अगर जिताया है तो आदिवासियों ने जिताया है।”
हनुमान जी आदिवासी थे – सिंघार
भगवान हनुमान जी को आदिवासी बताते हुए उमंग सिंघार ने कहा था कि ” हम हनुमान जी की पूजा करते हैं. गांव-गांव हनुमान जी के मंदिर हैं, जो हमारे वंशज है. उन्होंने आगे कहा कि मैं तो कहता हूं कि वह भी हमारे हैं, वह भी आदिवासी हैं।
रिजल्ट का इंतजार खत्म, यूपी बोर्ड कल करेगा 10वीं-12वीं का ऐलान
कानून-व्यवस्था पर सवाल: होमस्टे में विदेशी महिला से दुष्कर्म मामला
तिलक वर्मा का पावर प्ले: टी20 करियर का 5वां शतक जड़कर मुंबई को दिलाई सीजन की पहली बड़ी जीत।
CM के खिलाफ बगावत कर कुर्सी संभालने वाले भास्कर राव का निधन
हेलीकॉप्टर लैंडिंग बनी आफत, मनोज तिवारी के कार्यक्रम में मची अफरा-तफरी
IPL 2026: गेंदबाजी में विविधता और बल्लेबाजी में दम, आरसीबी के लिए संकटमोचक बने क्रुणाल पांड्या।
सत्ता संभालते ही घिरे बालेश शाह, चारों तरफ विरोध की लहर