दिल्ली को मिलेगा आधुनिक जल शोधन संयंत्र
दिल्ली |मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जल बोर्ड की समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि चंद्रावल का नया जल शोधन संयंत्र इसी साल शुरू हो जाएगा। 599 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह संयंत्र राजधानी के बड़े हिस्से को साफ और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराएगा। पानी की कमी और लीकेज की पुरानी समस्या खत्म होगी।मुख्यमंत्री ने सोमवार को जल बोर्ड की समीक्षा बैठक करते हुए कहा कि 105 एमजीडी क्षमता वाला यह अत्याधुनिक संयंत्र इस साल हर हाल में चालू हो जाएगा। इसके शुरू होते ही दिल्ली की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। ये परियोजना 2012 में शुरू हुई थी, लेकिन पिछली सरकार की लापरवाही, बार-बार टेंडर रद्द होने और तकनीकी अड़चनों के चलते वर्षों तक अटकी रही। इसके कारण न सिर्फ लोगों को पानी की परेशानी झेलनी पड़ी, बल्कि परियोजना की लागत भी करीब 400 करोड़ रुपये बढ़ गई। वर्तमान सरकार ने जाइका और भारत सरकार के साथ समन्वय कर इन अड़चनों को दूर किया और अतिरिक्त बजट देकर काम को आगे बढ़ाया।
दिल्ली की 11 फीसदी आबादी की बुझेगी प्यास
सीएम ने बताया कि चंद्रावल संयंत्र से करीब 92 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में जल आपूर्ति होगी, जो दिल्ली के कुल क्षेत्रफल का करीब 6.20 फीसदी है। इससे मॉडल टाउन, सदर बाजार, चांदनी चौक, मटिया महल, बल्लीमारान, करोल बाग, पटेल नगर, राजेंद्र नगर और आरके पुरम जैसे घनी आबादी वाले इलाकों को लाभ मिलेगा। यह परियोजना दिल्ली की करीब 11 फीसदी आबादी की पानी की जरूरतें पूरी करेगी। इससे जल आपूर्ति की गुणवत्ता सुधरेगी और खासकर गर्मियों के दौरान लोगों तक ज्यादा साफ पानी पहुंचेगा।
बदली जाएंगी पुरानी पाइप लाइनें
सरकार ने जल वितरण व्यवस्था को सुधारने के लिए 1331 करोड़ रुपये की लागत से पानी की सप्लाई करने वाली पुरानी पाइप लाइनों को बदलने का भी फैसला किया है। नौ विधानसभा क्षेत्रों में वेस्ट ईस्ट और सेंट्रल चंद्रावल नाम से तीन वितरण परियोजनाएं बनाई गई हैं, जिनमें से दो को हाल ही में अवार्ड किया गया है। इन परियोजनाओं के तहत करोल बाग सिविल लाइंस कमला नगर मलकागंल शादीपुर पटेल नगर शास्त्री नगर नारायण,जखीरा, न्यू राजेंद्र नगर, हिंदूराव, ईदगाह, झंडेवालान, रिज रोड, रामलीला ग्राउंड और सुभाष पार्क जैसे इलाकों में नई पाइप लाइनें डाली जाएंगी। इसके साथ ही अंडरग्राउंड रिजर्वायर को मजबूत किया जाएगा, मीटर लगाए जाएंगे, पानी के दूषित होने से रोकने के उपाय होंगे और शिकायत समाधान केंद्र खोले जाएंगे। सरकार का लक्ष्य है कि इन इलाकों में नॉन-रेवेन्यू वाटर को तीन साल के भीतर 30-45 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी से नीचे लाया जाए। नई पाइप लाइनों के रखरखाव के लिए 12 साल का अलग समझौता भी किया जाएगा।
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