हाईकोर्ट ने अखिलेश सरकार के खिलाफ आदेश को अस्थायी तौर पर रोका
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. दरअसल, अखिलेश यादव को जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट कार्यालय के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है. अखिलेश यादव इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं. यूपी सरकार ने इस ट्रस्ट के कार्यालय को खाली कराने का आदेश दिया था. हालांकि, अब हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ट्रस्ट का कार्यालय खाली करने का निर्देश दिया गया था.
साथ ही अदालत ने इस संबंध में यूपी सरकार को फटकार लगाते हुए जवाब भी मांगा है. कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि अगर ट्रस्ट के कार्यालय का आवंटन पहले ही रद्द हो चुका है तो अब तक किराया क्यों ले रहे हैं. हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ट्रस्ट को आवंटित बंगला नंबर 7 विक्रमादित्य मार्ग को खाली कराने के आदेश पर रोक लगा दी है. यह आदेश जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मनीष कुमार की खंडपीठ ने दिया है.
क्या है पूरा मामला?
जनेश्वर मिश्रा ट्रस्ट को यह बंगला 30 जनवरी 2017 को 72 हजार रुपए महीने के किराए पर आवंटित किया गया था. आवंटन की शुरुआत में समय सीमा 5 साल तय की गई थी. जिसे बाद में संपत्ति विभाग ने अपने विनियमों के तहत बढ़ाकर 10 साल कर दिया था. इसी के बाद योगी आदित्यनाथ यूपी के मुख्यमंत्री बने. तभी साल 2021 में इस ट्रस्ट के कार्यालय आवंटन को लेकर नियम बदल दिया गया. नियम में बदलाव करके यह फैसला हुआ कि आवंटन की समयसीमा 5 साल से अधिक नहीं की जाएगी. इस हिसाब से देखा जाए तो ट्रस्ट के ऑफिस का आवंटन 2 जनवरी 2022 को खत्म हो गया था.
ट्रस्ट ने क्या दावा किया?
ट्रस्ट की ओर से दायर याचिका में बंगले के आवंटन को नियमों के तहत बताते हुए उसे निरस्त करने या खाली कराने की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी. ट्रस्ट की तरफ से यह भी दावा किया गया कि यूपी सरकार का ये नियम गलत है और सरकार की मंशा ट्रस्ट से उसका ऑफिस लेने की है. इसी को लेकर हाई कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा कि जब आवंटन 2022 में खत्म हो गया तो किराया क्यों लेते रहे? अब अदालत ने सरकार को इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं. उनके करीबी नेता राजेन्द्र चौधरी इसके सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. साथ ही अखिलेश के चचेरे भाई और सांसद धर्मेन्द्र यादव भी इस ट्रस्ट के मेंबर हैं. हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से ट्रस्ट को फिलहाल बड़ी राहत मिल गई है.
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